तलारी नरेश बनाम तेलंगाना राज्य | 2026
SUPREME COURT PDF :| क्या एक 'प्रतिकूल गवाह' (Hostile Witness) की गवाही का उपयोग केवल सजा (Conviction) देने के लिए किया जा सकता है, या उसका उपयोग आरोपी को दोषमुक्त (Acquittal) करने के लिए भी किया जा सकता है ? साथ ही, क्या घटना स्थल (Place of Occurrence) साबित न होने पर दोषसिद्धि बनी रह सकती है ?
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने अपीलकर्ता की दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि साक्ष्य की सराहना (Appreciation of Evidence) का सिद्धांत यह कहता है कि यदि शत्रुतापूर्ण गवाह की गवाही विश्वसनीय लगती है, तो उसका उपयोग अभियोजन (Prosecution) के मामले को खारिज करने और आरोपी को बरी करने के लिए किया जा सकता है।___कोर्ट ने कहा कि यदि शत्रुतापूर्ण गवाह की गवाही से सजा संभव है, तो उसी गवाही से दोषमुक्ति भी संभव है यदि वह अन्य साक्ष्यों के साथ पढ़ने पर विश्वसनीय लगे।
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• गवाहों का विरोधाभास: अभियोजन पक्ष के गवाहों (PW 1, 3, 4 और 5) के बयानों में गंभीर विरोधाभास था, जिससे अपराध के स्थान (Place of Occurrence) पर ही संदेह पैदा हो गया।
• बुनियाद का अभाव: जब गवाहों ने घटना स्थल और घटना के तरीके का समर्थन नहीं किया, तो अभियोजन के मामले का आधार (Fulcrum) ही समाप्त हो गया।
• स्वतंत्र गवाहों की कमी: घटना व्यस्त सड़क पर हुई बताई गई थी, फिर भी किसी स्वतंत्र गवाह का न होना मामले को संदिग्ध बनाता है।
यह निर्णय निचली अदालतों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक है। यह स्थापित करता है कि गवाह के 'होस्टाइल' होने मात्र से उसकी पूरी गवाही बेकार नहीं हो जाती; बल्कि उसका वह हिस्सा जो बचाव पक्ष के हक में है और विश्वसनीय है, दोषमुक्ति का आधार बन सकता है।
यह मामला साल 2013 की एक हत्या से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, मृतक (शिव शंकर) और आरोपी की बहन प्रेम संबंध में थे और घर से भाग गए थे। पंचायत के फैसले के बाद मृतक गांव से बाहर चला गया था। 12 मई 2013 को जब वह एक शादी में शामिल होने गांव लौटा, तो आरोपी (तलारी नरेश) ने उसे कथित तौर पर पत्थर से पीट-पीटकर मार डाला। ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट ने आरोपी को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
सुप्रीम कोर्ट ने अपील पर सुनवाई करते हुए पाया कि मामले के मुख्य गवाह (PW 1, 3, 4 और 5) 'होस्टाइल' (प्रतिकूल) हो गए थे और उन्होंने घटना स्थल तथा घटना के समय पर विरोधाभासी बयान दिए। कोर्ट ने माना कि व्यस्त सड़क पर घटना होने के बावजूद कोई स्वतंत्र गवाह नहीं था। साक्ष्यों में गंभीर विसंगतियों के कारण, सुप्रीम कोर्ट ने दोषसिद्धि को रद्द कर आरोपी को बरी कर दिया।
https://www.sci.gov.in/view-pdf/?diary_no=385012025&type=j&order_date=2026-05-13&from=latest_judgements_order
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